पहली वह्य - हिरा की गुफा में जिब्रील का आना
मक्की दौर
जब नबी सल्ल० की उम्र चालीस वर्ष के क़रीब पहुंची, तो आप मक्का से क़रीब दो मील दूर हिरा पहाड़ी की गुफा में एकांतवास करने लगे। रमज़ान की 21 तारीख़, सोमवार की रात, सन् 610 ईस्वी में हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम प्रकट हुए और सूरः अलक़ की शुरुआती आयतें लेकर पहली वह्य पहुंचाई, जिसके बाद घबराए हुए नबी सल्ल० हज़रत ख़दीजा रज़ि० के पास लौटे, जिन्होंने उन्हें दिलासा देकर अपने चचेरे भाई वरक़ा बिन नौफ़ल के पास पहुंचाया।
पूरी कहानी:
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्र जब चालीस वर्ष के क़रीब पहुंची, तो आपको तंहाई बहुत प्रिय होने लगी और आप सत्तू व पानी लेकर मक्का से क़रीब दो मील दूर हिरा पहाड़ी की एक छोटी-सी गुफा में जा ठहरते, जहां पूरे रमज़ान महीने अल्लाह की इबादत करते और सृष्टि पर चिंतन-मनन करते रहते, क्योंकि आपकी क़ौम के खोखले और शिर्क से भरे अक़ीदों से आपको तनिक भी इत्मीनान नहीं था, हालांकि सामने कोई स्पष्ट रास्ता भी नज़र नहीं आता था। यह एकांतप्रियता क़रीब तीन साल चली, जिसमें शुरू के छह महीने आपको सच्चे व स्पष्ट सपने नज़र आते रहे, जो सुबह के उजाले की तरह हक़ीक़त बनकर सामने आते। आख़िर हिरा में एकांतवास के तीसरे साल, रमज़ान की 21 तारीख़, सोमवार की रात, जो 10 अगस्त सन् 610 ईस्वी के बराबर बैठती है, जब चांद के हिसाब से आपकी उम्र चालीस वर्ष छह महीने बारह दिन थी, अल्लाह ने आपको नुबूवत का पद अता किया और हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम गुफा में प्रकट हुए। उन्होंने फ़रमाया पढ़ो, नबी सल्ल० ने जवाब दिया मैं पढ़ा हुआ नहीं हूं, जिब्रील ने आपको तीन बार कसकर पकड़ा और छोड़ा, और तीसरी बार सूरः अलक़ की शुरुआती आयतें (पढ़ो अपने रब के नाम से, जिसने पैदा किया) सुनाईं। इसके बाद नबी सल्ल० दिल थामे कांपते हुए हज़रत ख़दीजा रज़ि० के पास लौटे और फ़रमाया मुझे चादर ओढ़ा दो, फिर बताया कि मुझे अपनी जान का डर लगता है। हज़रत ख़दीजा रज़ि० ने दिलासा देते हुए कहा कि अल्लाह आपको कभी रुसवा नहीं करेगा, क्योंकि आप रिश्तेदारों से नाता जोड़ते हैं, बेसहारों का सहारा बनते हैं, मेहमानों का सत्कार करते हैं और परेशान लोगों की मदद करते हैं। इसके बाद वे नबी सल्ल० को अपने चचेरे भाई वरक़ा बिन नौफ़ल के पास ले गईं, जो अज्ञानता-युग में ही ईसाई हो चुके थे और इंजील का इबरानी में अनुवाद करते थे। नबी सल्ल० से पूरा वाक़िया सुनकर वरक़ा ने कहा कि यह वही नामूस (फ़रिश्ता जिब्रील) है जो मूसा अलैहिस्सलाम पर उतरा था, और भविष्यवाणी की कि आपकी क़ौम आपको झुठलाएगी और मक्का से निकाल देगी, साथ ही यह इच्छा भी जताई कि काश वे उस दिन तक जीवित रहें ताकि आपकी मदद कर सकें।

⚠️ कुछ गलत लगा?

अगर आपको इस पेज पर कोई ग़लती (तर्जुमा, तथ्य, या कुछ और) दिखी हो, तो हमें बताएं — हम जांच करके ठीक करेंगे।

0%