वह्य में रुकावट (फ़त्रतुल वह्य)
मक्की दौर
पहली वह्य के बाद कुछ समय तक जिब्रील अलैहिस्सलाम दोबारा नहीं आए, जिस दौरान नबी सल्ल० बहुत बेचैन और दुखी रहे, यहां तक कि कई बार पहाड़ की चोटी से गिरने का विचार भी आता, पर हर बार हज़रत जिब्रील प्रकट होकर उन्हें अल्लाह का सच्चा रसूल होने का यक़ीन दिलाते और उनका दिल शांत हो जाता। यह रुकावट क़रीब दस दिन तक रही, जिसका मक़सद वह्य के डर को समाप्त कर उसके आने का शौक़ पैदा करना था।
पूरी कहानी:
पहली वह्य के बाद कुछ समय के लिए वह्य का सिलसिला रुक गया, जो सहीह रिवायतों के मुताबिक़ क़रीब दस दिन तक रहा। इस दौरान नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम बेहद बेचैन, उदास और चकित रहे। सहीह बुख़ारी की रिवायत के मुताबिक़ इस रुकावट से आप इतने दुखी हुए कि कई बार ऊंचे पहाड़ों की चोटियों पर इस इरादे से गए कि वहां से गिर पड़ें, लेकिन जब भी किसी पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर ऐसा करने का विचार बनता, तो हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम प्रकट हो जाते और फ़रमाते, ऐ मुहम्मद, आप वाक़ई अल्लाह के सच्चे रसूल हैं, जिसे सुनकर आपकी बेचैनी थम जाती, दिल को क़रार आ जाता और आप वापस लौट आते। हाफ़िज़ इब्ने हजर के अनुसार यह रुकावट इसलिए आई थी ताकि नुबूवत की पहली मुलाक़ात से पैदा हुआ डर व सहम दूर हो जाए और उसकी जगह वह्य के दोबारा आने का बेसब्री से इंतज़ार व लालसा पैदा हो जाए। जब यह मक़सद पूरा हो गया और नबी सल्ल० वह्य के इंतज़ार में रहने लगे, तो अल्लाह ने दोबारा वह्य भेजनी शुरू कर दी।

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