वह्य में रुकावट के बाद जब नबी सल्ल० हिरा से लौट रहे थे, तो आसमान से आवाज़ सुनकर ऊपर देखा तो वही फ़रिश्ता आसमान और ज़मीन के बीच एक तख़्त पर बैठा नज़र आया। घबराकर घर लौटे और चादर ओढ़ने को कहा, जिस पर सूरः अल-मुद्दस्सिर की आयतें उतरीं, जिनमें नबी सल्ल० को उठकर अल्लाह की तरफ़ बुलाने और डराने (इंज़ार) का काम शुरू करने का हुक्म दिया गया, और नबी सल्ल० इसके बाद बीस साल से ज़्यादा लगातार इसी काम में जुटे रहे।
पूरी कहानी:
वह्य में रुकावट की मुद्दत ख़त्म होने के बाद नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ख़ुद बताते हैं कि मैं हिरा में एक महीने का एतकाफ़ पूरा करके नीचे उतर रहा था, जब वादी में पहुंचा तो मुझे पुकारा गया, मैंने आगे-पीछे, दाएं-बाएं देखा तो कुछ न दिखा, फिर ऊपर निगाह की तो देखा वही फ़रिश्ता, जो हिरा में आया था, आसमान और ज़मीन के बीच एक तख़्त पर बैठा है। इस मंज़र से आप इतने डर गए कि घर वापस आकर फ़रमाया मुझे चादर ओढ़ा दो, मुझे चादर ओढ़ा दो, और लोगों ने चादर ओढ़ा दी। इसी हालत में सूरः अल-मुद्दस्सिर की शुरुआती आयतें नाज़िल हुईं, ऐ चादर ओढ़ने वाले उठिए और डराइए, अपने रब की बड़ाई कीजिए, अपने कपड़े पाक रखिए, गंदगी से दूर रहिए, एहसान करके ज़्यादा वापसी न चाहिए, और अपने रब की ख़ातिर सब्र कीजिए। इन आयतों में दरअसल पूरी दावत व तब्लीग़ की बुनियाद रख दी गई। इंज़ार यानी डराने का मतलब यह हुआ कि लोगों को उनके बुरे कामों के ख़तरनाक अंजाम और आख़िरत के हिसाब-किताब से आगाह किया जाए। रब की बड़ाई बयान करने का तक़ाज़ा यह था कि धरती पर सिर्फ़ अल्लाह की बड़ाई बाक़ी रहे और बाक़ी सब झूठे माबूदों की शौकत तोड़ दी जाए। कपड़ों की पाकी से मुराद असल में दिल व आचरण की पाकी थी, ताकि इंसान इतना पाक-साफ़ बन जाए कि नेक लोग उसकी तरफ़ खिंचे चले आएं। एहसान का बदला न चाहने का मतलब था कि दावत का काम बिना किसी दुनियावी मक़सद के, सिर्फ़ अल्लाह की ख़ुशी के लिए किया जाए। और आख़िर में सब्र की ताकीद इसलिए की गई क्योंकि आगे विरोधियों की तरफ़ से मज़ाक़, दुत्कार से लेकर जान के ख़तरे तक हर तरह की तकलीफ़ का सामना करना था। इन आयतों की भाषा भी बड़ी सख़्त और चेतावनी भरी थी, जिसमें नबी सल्ल० को आराम व नींद छोड़कर उठने और अथक परिश्रम व जिहाद के मैदान में उतरने के लिए ललकारा गया था। चुनांचे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उठ खड़े हुए और उसके बाद बीस साल से भी ज़्यादा समय तक लगातार इसी दावत के काम में डटे रहे, आराम व सुख-चैन को हमेशा के लिए तज दिया।