अल्लाह के रसूल सल्ल० पर सीधा ज़ुल्म व सितम
मक्की दौर
क़ुरैश के सरदार बार-बार अबू तालिब के पास जाकर धमकी देते रहे कि वे अपने भतीजे को रोकें, वरना नतीजा बुरा होगा, लेकिन अबू तालिब हर बार टाल-मटोल करते हुए भी नबी सल्ल० की हिफ़ाज़त से पीछे नहीं हटे। इसके साथ ही पड़ोसियों ने नमाज़ पढ़ते वक़्त नबी सल्ल० पर गंदगी व जानवरों की अंतड़ियां फेंकना, अबू जहल का उन्हें पैर तले रौंदने की धमकी देना, और उक़्बा बिन अबी मुऐत का उनके कंधों पर ऊंट की ओझड़ी डाल देना जैसी सीधी हरकतें शुरू कर दीं।
पूरी कहानी:
जब मुसलमानों पर अत्याचार से भी दावत नहीं रुकी, तो मक्का के सरदार बार-बार अबू तालिब के पास प्रतिनिधिमंडल भेजते रहे। पहली बार उन्होंने शिकायत की कि आपके भतीजे ने हमारे माबूदों को बुरा-भला कहा और हमारे बाप-दादा को गुमराह बताया है, इसलिए या तो उन्हें रोकिए या हमारे और उनके बीच से हट जाइए, जिसका अबू तालिब ने नर्मी से टाल दिया और नबी सल्ल० अपनी दावत जारी रखते रहे। जब दावत नहीं रुकी, तो सरदार दोबारा आए और सख़्त धमकी दी कि हम यह बर्दाश्त नहीं कर सकते कि हमारे बाप-दादा को गालियां दी जाएं, इसलिए रोक दीजिए, वरना हम आपसे व उनसे ऐसी लड़ाई लड़ेंगे कि एक फ़रीक़ का सफ़ाया हो जाए। इस धमकी से अबू तालिब बहुत परेशान हुए और नबी सल्ल० को बुलाकर कहा कि मुझ पर इतना बोझ न डालें जो मेरे वश से बाहर हो, लेकिन जब नबी सल्ल० ने दृढ़ता से जवाब दिया कि अगर वे सूरज मेरे दाहिने हाथ पर और चांद बाएं हाथ पर रख दें, तब भी मैं यह काम नहीं छोड़ूंगा, यहां तक कि अल्लाह इसे ग़ालिब करे या मैं इसी राह में मिट जाऊं, तो अबू तालिब ने आंसुओं के साथ कहा कि भतीजे, जाओ जो चाहो कहो, ख़ुदा की क़सम मैं तुम्हें कभी किसी के हवाले नहीं करूंगा। मक्का की कुछ मूर्ख औरतें भी नबी सल्ल० को पत्थर मारने की धमकियां देतीं, हालांकि एक मौक़े पर अल्लाह ने ऐसी एक औरत की आंखों पर पर्दा डाल दिया और वह हज़रत अबूबक्र रज़ि० के सामने खड़े होकर भी नबी सल्ल० को न देख सकी। घर के अंदर भी नबी सल्ल० को चैन न था, चचा अबू लहब समेत कुछ पड़ोसी जान-बूझकर जब आप नमाज़ पढ़ते या खाना पकातीं, तो बकरी की गंदी अंतड़ियां इस तरह फेंकते कि वे आप पर या हांडी में जा गिरतीं, जिससे आपको मजबूरन एक घेरा बनाना पड़ा। एक बार उक़्बा बिन अबी मुऐत ने, अबू जहल के उकसाने पर, नमाज़ में सज्दे की हालत में नबी सल्ल० के कंधों के बीच ऊंट की गंदी ओझड़ी ला रखी, जिसे बाद में आपकी बेटी हज़रत फ़ातिमा रज़ि० ने आकर हटाया। एक बार अबू जहल ने क़सम खाई कि अगर उसने नबी सल्ल० को सज्दा करते देखा तो उनकी गर्दन पैरों तले रौंद देगा, लेकिन जब वह क़रीब पहुंचा तो अचानक डर के मारे पीछे हट गया और बाद में बताया कि उसके व नबी सल्ल० के बीच एक भयानक खाई और फ़रिश्तों का पहरा नज़र आया। नबी सल्ल० ने ख़ुद फ़रमाया कि अगर वह क़रीब आता तो फ़रिश्ते उसका एक-एक अंग नोच लेते। इसी तरह उक़्बा बिन अबी मुऐत नबी सल्ल० पर थूकता, उबई बिन ख़लफ़ सड़ी हड्डी तोड़कर हवा में उड़ाता, और अख़नस बिन शुरैक़ जैसे लोग बात तो सुनते पर मानते नहीं थे, बल्कि रास्ता रोकते और धमकियां देते रहते। यह सारी घटनाएं उस लंबे दमन-चक्र की झलक हैं, जो मक्का के सरकश मुशरिकों ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ रचा, लेकिन आप अपनी दावत पर अडिग रहे।

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