मुशरिकों ने नबी सल्ल० से ऐसी निशानी मांगी जिससे उनकी नुबूवत साबित हो, इस पर अल्लाह ने चांद को दो टुकड़ों में विभाजित कर दिखा दिया, यहां तक कि लोगों ने दोनों टुकड़ों के बीच हिरा पहाड़ को देखा। इस स्पष्ट मोजज़े के बावजूद क़ुरैश ने इसे जादू क़रार देकर मानने से इंकार कर दिया।
पूरी कहानी:
मुशरिकों ने बार-बार नबी सल्ल० से कोई ख़ास निशानी दिखाने की मांग की थी ताकि वे यक़ीन कर सकें कि आप वाक़ई अल्लाह के रसूल हैं। एक मौक़े पर उन्होंने बिना कुछ तय किए यह मांग रखी कि कोई भी निशानी दिखा दें, जिससे वे जान सकें। नबी सल्ल० ने अपने रब से दुआ की, जवाब में हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम आए और बताया कि आज रात निशानी दिखाई जाएगी। उसी रात अल्लाह ने चांद को दो टुकड़ों में बांटकर दिखा दिया। सहीह बुख़ारी में हज़रत अनस बिन मालिक रज़ि० की रिवायत है कि मक्का वालों की मांग पर आपने उन्हें चांद के दो टुकड़े होते हुए दिखाया, यहां तक कि उन्होंने दोनों टुकड़ों के बीच से हिरा पहाड़ को देखा। हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ि० बताते हैं कि यह घटना उस वक़्त हुई जब वे मिना में नबी सल्ल० के साथ थे, आपने फ़रमाया, गवाह रहो, और चांद का एक टुकड़ा फटकर पहाड़ (जबल अबू क़ुबैस) की तरफ़ चला गया। यह मोजज़ा इतना स्पष्ट था कि क़ुरैश ने इसे देर तक ध्यान से देखा, आंखें मल-मलकर देखा और स्तब्ध रह गए, फिर भी ईमान नहीं लाए, बल्कि कहा कि यह चलता-फिरता जादू है और मुहम्मद ने हमारी आंखों पर जादू कर दिया है। इस पर कुछ लोगों ने तर्क दिया कि अगर मुहम्मद ने सिर्फ़ हम पर जादू किया है, तो वे सारी दुनिया पर जादू नहीं कर सकते, इसलिए बाहर से आने वाले क़ाफ़िलों से पूछा जाए, और जब बाहर से आने वाले हर व्यक्ति ने इसी घटना की पुष्टि की, तब भी ज़ालिम लोग ईमान नहीं लाए और अपनी हठधर्मी पर क़ायम रहे। इस घटना का सही समय विद्वानों में मतभेद का विषय रहा है, कुछ ने हिजरत से पांच साल पहले (सन् 08 नबवी) तो कुछ ने सन् 09 नबवी बताया है, लेकिन उन वर्षों में तो बनू हाशिम व बनू मुत्तलिब का मुकम्मल बाइकाट चल रहा था और बातचीत तक बंद थी, इसलिए यह ज़्यादा माक़ूल राय है कि यह घटना सन् 10 या 11 नबवी में घटी, जो हज या मिना के मौसम से मेल खाती है, जैसा कि हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ि० के बयान से भी झलकता है। यह मोजज़ा शायद आगे आने वाली मेराज की महान घटना की एक प्रस्तावना भी था, ताकि लोगों का दिल असाधारण घटनाओं को स्वीकार करने के लिए कुछ तैयार हो सके।