नबी सल्ल० ने हज़रत साद बिन अबी वक़्क़ास रज़ि० को बीस आदमियों की कमान देकर एक क़ुरैशी क़ाफ़िले का पता लगाने भेजा और ख़र्रार से आगे न बढ़ने की ताकीद की। यह टुकड़ी रात में चलकर व दिन में छिपकर पांचवें दिन ख़र्रार पहुंची, पर पता चला कि क़ाफ़िला एक दिन पहले ही निकल चुका है।
पूरी कहानी:
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इस सरीये का अमीर हज़रत साद बिन अबी वक़्क़ास रज़ि० को मुक़र्रर किया और उन्हें बीस आदमियों की कमान देकर क़ुरैश के एक क़ाफ़िले का पता लगाने के लिए रवाना फ़रमाया, साथ ही यह ताकीद की कि ख़र्रार से आगे न बढ़ें। ये लोग पैदल रवाना हुए, रात को सफ़र करते और दिन में छिपे रहते। पांचवें दिन सुबह ख़र्रार पहुंचे तो मालूम हुआ कि क़ाफ़िला एक दिन पहले ही जा चुका है। इस सरीये का झंडा सफ़ेद था और झंडाबरदार हज़रत मिक़दाद बिन अम्र रज़ि० थे।