क़र्ज़ बिन जाबिर फ़हरी ने मुशरिकों की एक छोटी सेना के साथ मदीना की चरागाह पर छापा मारकर मवेशी लूट लिए। नबी सल्ल० सत्तर सहाबा के साथ बद्र के पड़ोस में स्थित सफ़वान घाटी तक उसका पीछा करते गए, लेकिन उसे पकड़ नहीं पाए। इसे कुछ लोग पहली बद्र की लड़ाई भी कहते हैं।
पूरी कहानी:
इस ग़ज़वे की वजह यह बनी कि क़र्ज़ बिन जाबिर फ़हरी ने मुशरिकों की एक छोटी-सी सेना के साथ मदीने की चरागाह पर छापा मारा और कुछ मवेशी लूट लिए। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने सत्तर सहाबा के साथ उसका पीछा किया और बद्र के पड़ोस में स्थित सफ़वान घाटी तक तशरीफ़ ले गए, लेकिन क़र्ज़ और उसके साथियों को न पा सके और बिना किसी टकराव के वापस लौट आए। इस ग़ज़वे को कुछ इतिहासकार पहली बद्र की लड़ाई भी कहते हैं। इस दौरान मदीने का अमीर हज़रत ज़ैद बिन हारिसा रज़ि० को बनाया गया था। झंडा सफ़ेद था और झंडाबरदार हज़रत अली रज़ि० थे।