ग़ज़वा ज़ुल उशैरा (जुमादल ऊला/आख़र 2 हि॰)
ग़ज़वात व सराया
नबी सल्ल० डेढ़-दो सौ मुहाजिरों के साथ शाम जा रहे एक धनी क़ुरैशी क़ाफ़िले का पीछा करते हुए ज़ुल उशैरा तक पहुंचे, लेकिन क़ाफ़िला कई दिन पहले ही निकल चुका था। यही वह क़ाफ़िला था जिसे शाम से वापसी पर रोकने की कोशिश आगे चलकर बद्र की लड़ाई का सबब बनी।
पूरी कहानी:
इस मुहिम में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ डेढ़ या दो सौ मुहाजिर थे, लेकिन आपने किसी को साथ चलने पर मजबूर नहीं किया। सवारी के लिए सिर्फ़ तीस ऊंट थे, इसलिए लोग बारी-बारी सवार होते थे। निशाने पर क़ुरैश का एक क़ाफ़िला था जो भारी माल लेकर शाम देश जा रहा था। आप उसकी तलाश में ज़ुल उशैरा तक पहुंचे, लेकिन आपके पहुंचने से कई दिन पहले ही क़ाफ़िला जा चुका था। यही वह क़ाफ़िला है जिसे शाम से वापसी पर नबी सल्ल० ने गिरफ़्तार करना चाहा था, तो यह क़ाफ़िला तो बच निकला, लेकिन इसी कोशिश की वजह से आगे चलकर बद्र की लड़ाई हो गई।

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